Shiv Puran Katha in Hindi
By: Stream Panther Network
Language: hi
Categories: Religion, Spirituality, Hinduism
शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,
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पार्वती-शिव का दार्शनिक संवाद | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 13
Jan 04, 2026यह अध्याय शिव पुराण के उस अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग का वर्णन करता है जहाँ देवी पार्वती भगवान शिव की कठोर तपस्या, सेवा और भक्ति द्वारा उनके हृदय को जीत लेती हैं।
देवताओं के कल्याण हेतु पार्वती-शिव का दिव्य संयोग आवश्यक था, क्योंकि तारकासुर के वध के लिए शिव के तेजस्वी पुत्र का जन्म होना था।
इस अध्याय में पार्वती की निष्ठा, कामदेव का भस्म होना, शिव की समाधि, और अंततः देवी पार्वती की तपस्या की सिद्धि का अत्यंत प्रेरणादायक वर्णन मिलता है। यह कथा भक्ति, त्याग, धैर्य और शिव-शक्ति के दिव्य रहस्य को प्रकट करती है।
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शिव पुराण - पार्वती को सेवा में रखने के लिए हिमालय का शिव को मनाना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 12
Dec 28, 2025बारहवें अध्याय में हिमालय द्वारा भगवान शिव को पार्वती की सेवा के लिए मनाने की पवित्र कथा सुनाई गई है।
इस प्रसंग में हिमालय का भक्तिभाव, शिवजी की तपस्या, और पार्वती की महाशक्ति का गूढ़ स्वरूप उजागर होता है।
कथा बताती है कि क्यों शिवजी तपस्वियों के लिए स्त्री–संग को बाधक मानते हैं, और कैसे हिमालय अपने दलित हृदय से शिवजी से विनती करते हैं। यह अध्याय भक्ति, तप, विरक्ति, शिव–पार्वती संबंधों और हिमालय के उच्च आदर्शों का दिव्य समन्वय प्रस्तुत करता है।
शिव पुराण की इस अद्भुत कथा में दिव्य ज्ञान, धर्म, तपस्या और शिव–भक्ति का अद्वितीय संगम है।
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शिव पुराण - भगवान शिव की गंगावतरण तीर्थ में तपस्या | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 11
Dec 22, 2025भगवान शिव की गंगावतरण तीर्थ में तपस्या से जुड़ी इस पवित्र कथा में हिमालय पुत्री पार्वती, गिरिराज हिमालय और देवाधिदेव महादेव के दिव्य मिलन का अद्भुत वर्णन मिलता है।
जब महादेव ने पार्वती के जन्म का समाचार सुना, तब उन्होंने गंगोत्री के पावन स्थल पर एकांत में कठोर तप करने का निश्चय किया।
इस अध्याय में शिवजी की एकाग्रचित्त साधना, हिमालय द्वारा की गई भक्ति-पूजा, देवताओं की उपस्थितियाँ और गंगा के उद्गम स्थान का महात्म्य स्पष्ट रूप से प्रतिपादित है। यह कथा न केवल शिव-भक्ति की महानता दर्शाती है, बल्कि पार्वती के भविष्य में होने वाले शुभ विवाह की नींव भी रखती है।
गंगा, तपस्या, हिमालय और शिव की साधना—इन सभी का आध्यात्मिक संगम इस अध्याय को अत्यंत पावन और प्रेरणादायी बनाता है।
भगवान शिव की तपस्या
गंगावतरण कथा
हिमालय और शिव संवाद
शिव पार्वती की कथा
गंगा उद्गम स्थल
गंगोत्री की पौराणिक कथा
शिव पुराण अध्याय
देवाधिदेव महादेव
पार्वती जन्म कथा
शिव तपस्या वर्णन
गंगा का महत्व
Duration: 00:04:54शिव पुराण - भौम जन्म | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 10
Dec 14, 2025“शिव पुराण के दसवें अध्याय ‘भोम्-जन्म’ में वर्णित कथा भगवान शिव के तप, समाधि, सती-वियोग, दिव्य शिशु ‘भोम्’ के जन्म और पृथ्वी माता द्वारा उसके पालन-पोषण की अद्भुत लीला को प्रकट करती है।
इस अध्याय में शिव के अत्यंत पावन यश, उनके ध्यान, असंख्य वर्षों की समाधि, उनके मस्तक से गिरे पसीने से बालक भोम् का प्रकट होना और फिर उस दिव्य बालक का काशी जाकर कठोर तपस्या से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का वर्णन है।
यह कथा शिव-भक्तों, पुराण प्रेमियों, हिंदू धर्मग्रंथों के पाठकों और अध्यात्म में रुचि रखने वालों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। भोम्-जन्म अध्याय शिव की करुणा, शक्ति और अनंत लीला का अनूठा उदाहरण है।”
भोम् जन्म कथा
शिव पुराण दसवां अध्याय
भोम् का जन्म कैसे हुआ
भगवान शिव और भोम्
शिव पुराण कथा हिंदी में
सती-वियोग के बाद शिव की कथा
शिव की समाधि की कहानी
पृथ्वी माता और भोम्
शिव के पसीने से जन्मा बालक
भोम् की तपस्या और काशी
भोम् दिव्यलोक कथा
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Duration: 00:03:36शिव पुराण – पार्वती का स्वप्न | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 9
Dec 07, 2025“नवां अध्याय — पार्वती का स्वप्न” शिव पुराण का अत्यंत पवित्र अध्याय है, जिसमें देवी पार्वती के दिव्य जन्म, उनके भविष्य के संकेत, भगवान शिव से विवाह के पूर्व के शुभ स्वप्न और माता मैना-हिमालय की भावनाओं का दिव्य वर्णन मिलता है। इस अध्याय में बताया गया है कि देवी पार्वती को ब्रह्ममुहूर्त में एक अद्भुत स्वप्न प्राप्त होता है जिसमें एक तपस्वी ब्राह्मण (भगवान शिव का ही स्वरूप) उन्हें उनके भविष्य—‘शिवप्राणवल्लभा’ बनने का वरदान देते हैं। माता मैना और राजा हिमालय अपने-अपने स्वप्नों की व्याख्या एक-दूसरे से साझा करते हैं और पार्वती को शिव की तपस्या करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह अध्याय शिव-पार्वती प्रेम, भक्ति, तपस्या और दिव्य भविष्यवाणी को उजागर करता है। शिव पुराण पढ़ने वालों, भक्तों, अध्यात्म प्रेमियों और पुराणकथाओं के शोधकर्ताओं के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक है।
पार्वती का स्वप्न कथा
शिव पुराण नवां अध्याय
पार्वती का सपना शिव पुराण
माता पार्वती की तपस्या
भगवान शिव पार्वती विवाह कथा
मैना हिमालय संवाद
शिव पार्वती प्रेम कथा
शिवपुराण पार्वती अध्याय
ब्रह्ममुहूर्त स्वप्न कथा
देवी पार्वती जन्म और तपस्या
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Duration: 00:03:36शिव पुराण - मैना–हिमालय संवाद | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 8
Dec 01, 2025“शिव पुराण” के आठवें अध्याय में माता मैना और हिमालय के बीच हुआ दिव्य संवाद दर्शाया गया है, जिसमें माता मैना अपनी पुत्री पार्वती के भविष्य और विवाह को लेकर चिंतित होती हैं।
देवर्षि नारद की बातों को याद करते हुए वे हिमालय से पार्वती के लिए एक सुयोग्य, शुभ लक्षणों वाले वर की खोज करने का आग्रह करती हैं।
हिमालय उन्हें सांत्वना देते हुए बताते हैं कि यदि पार्वती को सच्चा सुख पाना है, तो उन्हें भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए तपस्या करनी होगी। वे समझाते हैं कि भगवान शंकर सदैव कल्याणकारी हैं, और यदि वे प्रसन्न हो जाएं तो स्वयं पार्वती का पाणिग्रहण करेंगे।
यह अध्याय भक्ति, तपस्या, मातृत्व, दिव्य भाग्य और शंकर-पार्वती के पवित्र मिलन की भूमिका को अत्यंत सुंदर रूप से प्रकट करता है।
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शिव पुराण - पार्वती का नामकरण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 7
Nov 23, 2025शिव पुराण का यह अध्याय देवी पार्वती के जन्म, नामकरण और भगवान शिव से उनके दिव्य संबंध की कथा को विस्तारपूर्वक वर्णित करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे देवी जगदंबिका ने हिमालय और मैना के घर जन्म लेकर पार्वती के रूप में अवतार लिया।
बाल्यकाल में पार्वती अत्यंत सुंदर, तेजस्वी और गुणों से युक्त थीं, जिससे हिमालय और मैना अत्यंत प्रसन्न थे। नारद मुनि ने हिमालय को भविष्यवाणी दी कि पार्वती का विवाह स्वयं भगवान शिव से होगा। इस कथा में सती के पुनर्जन्म की दिव्य लीला का भी उल्लेख है, जिसमें पार्वती को अपने पूर्व जन्म की स्मृति प्राप्त होती है।
भगवान शिव और पार्वती का प्रेम अलौकिक, शाश्वत और ब्रह्मांड के संतुलन का प्रतीक बताया गया है। नारद मुनि के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि सच्चा प्रेम और तपस्या ही ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग है। यह अध्याय शिव-पार्वती के पुनर्मिलन की कथा के रूप में भक्ति, प्रेम और त्याग का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
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शिव पुराण – पार्वती जन्म | श्रीरुद्र संहिता - तृतीय खंड | अध्याय 6
Nov 16, 2025“शिव पुराण – छठा अध्याय: पार्वती जन्म” में वर्णन है कि किस प्रकार देवी जगदंबा ने हिमालय और मैना के घर जन्म लेकर माता पार्वती का दिव्य अवतार धारण किया।
भगवती ने पहले हिमालय के हृदय में प्रवेश किया और फिर मैना के गर्भ से जन्म लिया। उनके जन्म के समय पूरा ब्रह्मांड प्रकाशमय हो गया — मंद-मंद हवा चलने लगी, पुष्पवृष्टि होने लगी और सभी देवता हिमालय के घर दर्शन हेतु आए।
देवी ने अपने दिव्य स्वरूप में माता मैना को दर्शन दिए और कहा — “मैं पृथ्वी पर भगवान शिव को पुनः अपना पति बनाऊंगी और जगत का उद्धार करूंगी।”
यह अध्याय माँ पार्वती के जन्म, उनके दिव्य रूप, तथा उनके भविष्य के उद्देश्य की कथा का विस्तार से वर्णन करता है — जिसमें भक्ति, मातृत्व और सृष्टि के संतुलन का अद्भुत संगम है।
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शिव पुराण कथा – मैना और हिमालय की तपस्या से देवी जगदंबा का वरदान |
Nov 10, 2025शिव पुराण के श्रीरुद्र संहिता के पाँचवें अध्याय में हिमालय और उनकी पत्नी मैना की अद्भुत तपस्या का वर्णन मिलता है। जब देवी सती ने अपने शरीर का त्याग किया और जगदंबा अंतर्धान हुईं, तब श्रीहरि विष्णु ने हिमालय और मैना को देवी जगदंबा की आराधना करने का उपदेश दिया।
दोनों ने सताईस वर्षों तक कठोर तप किया — चैत्रमास से प्रारंभ होकर नवमी और अमावस्या को व्रत, पूजा, दान और ब्राह्मण सेवा के माध्यम से उन्होंने देवी दुर्गा को प्रसन्न किया।
उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर देवी जगदंबा स्वयं प्रकट हुईं और उन्हें वरदान दिया कि वे उनके घर पुत्री रूप में जन्म लेंगी — वही पुत्री आगे चलकर पार्वती बनीं, जो शिवजी की अर्धांगिनी बनीं।
यह अध्याय शक्ति की कृपा, भक्ति की गहराई और तप के फल का जीवंत उदाहरण है।
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शिव पुराण – देवी जगदंबा का दिव्य स्वरूप और देवताओं की प्रार्थना | श्रीरुद्र संहिता - तृतीय खंड - अध्याय 4
Nov 03, 2025शिव पुराण के श्रीरुद्र संहिता के इस अध्याय में बताया गया है कि जब सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर योगाग्नि द्वारा अपना शरीर त्याग दिया, तब समस्त देवता विष्णु जी के साथ हिमालय के पास पहुँचे। उन्होंने हिमालय से प्रार्थना की कि देवी सती पुनः उनके घर जन्म लें और भगवान शिव की अर्धांगिनी बनें। श्रीविष्णु के वचनों से हिमालय अत्यंत प्रसन्न हुए और देवी जगदंबा की आराधना की।
इस प्रसंग में देवताओं द्वारा की गई जगदंबा उमा की भव्य स्तुति का वर्णन मिलता है — जिसमें उन्हें गायत्री, सावित्री, सरस्वती, लक्ष्मी और वेदों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में संबोधित किया गया है।
यह अध्याय दर्शाता है कि देवी सती का पुनर्जन्म पार्वती के रूप में हुआ और कैसे उनके तप, भक्ति और शिव के प्रति अटूट प्रेम ने सम्पूर्ण सृष्टि को पुनः संतुलन प्रदान किया। यह कथा भक्ति, त्याग और शक्ति के दिव्य संगम की प्रतीक है।
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शिव पुराण – देवताओं का हिमालय के पास जाना | श्रीरुद्र संहिता - तृतीय खंड | अध्याय 3
Oct 26, 2025शिव पुराण के श्रीरुद्र संहिता के इस अध्याय में बताया गया है कि जब सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर योगाग्नि द्वारा अपना शरीर त्याग दिया, तब समस्त देवता विष्णु जी के साथ हिमालय के पास पहुँचे। उन्होंने हिमालय से प्रार्थना की कि देवी सती पुनः उनके घर जन्म लें और भगवान शिव की अर्धांगिनी बनें।
श्रीविष्णु के वचनों से हिमालय अत्यंत प्रसन्न हुए और देवी जगदंबा की आराधना की। इस प्रसंग में देवताओं द्वारा की गई जगदंबा उमा की भव्य स्तुति का वर्णन मिलता है — जिसमें उन्हें गायत्री, सावित्री, सरस्वती, लक्ष्मी और वेदों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में संबोधित किया गया है।
यह अध्याय दर्शाता है कि देवी सती का पुनर्जन्म पार्वती के रूप में हुआ और कैसे उनके तप, भक्ति और शिव के प्रति अटूट प्रेम ने सम्पूर्ण सृष्टि को पुनः संतुलन प्रदान किया। यह कथा भक्ति, त्याग और शक्ति के दिव्य संगम की प्रतीक है।
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Duration: 00:05:10शिव पुराण – पार्वती, सीता और राधा का दिव्य जन्म | श्रीरुद्र संहिता (तृतीय खंड)
Oct 20, 2025शिव पुराण के श्रीरुद्र संहिता तृतीय खंड के इस अध्याय में बताया गया है कि पितरों की तीन कन्याएँ — मैना, धन्या और कालावती — शाप से मुक्त होकर पुनः अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त करती हैं। मैना की पुत्री पार्वती कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव की प्राणवल्लभा बनती हैं, धन्या की पुत्री सीता श्रीरामचंद्र की पत्नी बनती हैं, और कालावती की पुत्री राधा श्रीकृष्ण के स्नेह में बंधकर उनकी प्रिया बनती हैं। यह कथा शिव पुराण में भगवती पार्वती के जन्म, तपस्या और दिव्य मिलन की पवित्र भूमिका को उजागर करती है। जो भी इस कथा को श्रद्धा-भाव से पढ़ता या सुनता है, उसे मोक्ष, यश, आयु और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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Duration: 00:05:28शिव पुराण - हिमालय विवाह | श्रीरुद्र संहिता | (तृतीय खंड)
Oct 12, 2025“शिव पुराण – श्रीरुद्र संहिता” के इस प्रथम अध्याय हिमालय विवाह में बताया गया है कि देवी सती, जिन्होंने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में शरीर त्याग किया था, पुनर्जन्म लेकर हिमवान पर्वत की पुत्री ‘मैना’ के रूप में जन्मीं। यह अध्याय इस दिव्य कथा का आरंभ है, जिसमें ब्रह्माजी नारद मुनि के प्रश्नों का उत्तर देते हुए हिमालय पर्वत की महिमा, उसकी पवित्रता, और देवताओं के आगमन का सुंदर वर्णन करते हैं।
देवताओं और पितरों के संवाद में यह निर्णय होता है कि हिमवान का विवाह मैना से होना चाहिए — जो मंगल स्वरूपिणी हैं और जिनका यह दिव्य मिलन भविष्य में देवी पार्वती के जन्म का कारण बनेगा। विवाह उत्सव का अद्भुत वर्णन इस अध्याय में किया गया है, जिसमें सभी देवी-देवता, स्वयं श्रीहरि विष्णु सहित, इस शुभ अवसर के साक्षी बनते हैं।
यह कथा न केवल हिमालय की पवित्रता का गुणगान करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शिव–सती के प्रेम का पुनर्जन्म किस प्रकार होने वाला है। जो व्यक्ति इस कथा को श्रद्धाभाव से सुनता या पढ़ता है, उसे धर्म, ज्ञान और शांति की प्राप्ति होती है।
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Duration: 00:03:38शिव पुराण - दक्ष का यज्ञ को पूर्ण करना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 42
Oct 06, 2025शिव पुराण के सती खंड में देवी सती और भगवान शिव की दिव्य कथा का वर्णन है। इसमें दक्ष यज्ञ, देवी सती का आत्मत्याग, भगवान शिव का क्रोध, वीरभद्र का प्रकट होना और अंततः दक्ष का पुनर्जीवन शामिल है। यह कथा भक्तों को भक्ति, धैर्य और शिव कृपा की अद्भुत महिमा का अनुभव कराती है। इस अध्याय का पाठ करने से पापों से मुक्ति, यश, स्वर्ग और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।"
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शिव पुराण - शिव द्वारा दक्ष को जीवित करना - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 41
Sep 29, 2025शिव द्वारा दक्ष को पुनर्जीवित करने का अध्याय - इस अध्याय में भगवान शिव की करुणा और क्षमा की लीला का अद्भुत वर्णन है। दक्ष के यज्ञ-विध्वंस और उसके परिणामस्वरूप हुए विनाश के बाद सभी देवता, ऋषि-मुनि और विष्णु भगवान शिव से क्षमा और कृपा की याचना करते हैं। भगवान शिव प्रसन्न होकर यज्ञ को पूर्ण करते हैं, देवताओं के घावों को भरते हैं और दक्ष को जीवनदान देते हैं। यह कथा क्षमा, करुणा और पुनरुत्थान का गहरा संदेश देती है।
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शिव पुराण - ब्रह्माजी का कैलाश पर शिवजी से मिलना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 40
Sep 21, 2025शिव पुराण के इस अध्याय में देवता और ऋषि-मुनि भगवान शिव के क्रोध को शांत करने के लिए विनम्रता से क्षमा याचना करते हैं। यह कथा दिखाती है कि केवल भगवान शिव की कृपा से ही विनाश से रक्षा संभव है।
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शिव पुराण - दधीचि का शाप और क्षुव पर अनुग्रह | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 39
Sep 14, 2025शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता के उनचालीसवें अध्याय में दधीचि ऋषि और क्षुव के विवाद, भगवान विष्णु की लीला तथा महर्षि दधीचि के शाप का अद्भुत प्रसंग मिलता है। इस कथा के श्रवण से अपमृत्यु का भय मिटता है, युद्ध में विजयश्री की प्राप्ति होती है और अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
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शिव पुराण - दधीचि क्षुव विवाद | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 38
Sep 07, 2025शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता द्वितीय खंड के अड़तीसवें अध्याय में दधीचि और क्षुव के बीच विवाद का वर्णन है। इस कथा में अहंकार, श्राप, भगवान शिव की महिमा और महामृत्युंजय मंत्र की दिव्य शक्ति का गहन वर्णन मिलता है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि शिव की भक्ति और तपस्या से ही मोक्ष और कल्याण संभव है।
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Duration: 00:08:42शिव पुराण - दक्ष का सिर काटकर यज्ञ कुंड में डालना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 37
Sep 01, 2025शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता – द्वितीय खंड का सैंतीसवां अध्याय दक्ष प्रजापति के अंत का वर्णन करता है। वीरभद्र ने यज्ञशाला में घुसकर सभी देवताओं को परास्त किया और अंत में दक्ष का सिर काटकर यज्ञ कुंड में डाल दिया। यह प्रसंग शिवजी के अपमान और सती माता के त्याग के परिणामस्वरूप दक्ष के विनाश की कथा है।
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शिव पुराण - श्रीहरि और वीरभद्र का युद्ध | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 36
Aug 25, 2025शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता – द्वितीय खंड, छत्तीसवाँ अध्याय
इस अध्याय में श्रीहरि विष्णु और वीरभद्र के बीच हुए भयानक युद्ध का वर्णन है। शिवजी के अपमान और देवी सती के अन्याय के कारण उत्पन्न यह संग्राम देवताओं और ऋषियों के लिए भयावह सिद्ध हुआ।
वीरभद्र और महाकाली ने अनेक देवताओं और मुनियों को दंडित किया तथा उनकी करनी के अनुसार उन्हें परिणाम भोगना पड़ा। यह अध्याय हमें सिखाता है कि शिव और सती का अपमान करने का परिणाम कितना गंभीर हो सकता है।
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Duration: 00:06:47शिव पुराण - वीरभद्र का आगमन | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 35
Aug 18, 2025शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता के पैंतीसवें अध्याय में वीरभद्र के प्रकट होने और यज्ञ मण्डप में उनके आगमन का दिव्य वर्णन है। दक्ष के अहंकार और शिव का अपमान करने के दुष्परिणामस्वरूप जब यज्ञ विनाश के कगार पर पहुँचता है, तब वीरभद्र और महाकाली अपनी विशाल सेना के साथ प्रकट होकर यज्ञशाला की ओर बढ़ते हैं। भयभीत दक्ष और देवता श्रीहरि विष्णु की शरण में जाकर रक्षा की प्रार्थना करते हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि शिव की अवहेलना करने वाला कोई भी कर्म कभी सफल नहीं हो सकता।
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Duration: 00:05:28शिव पुराण - यज्ञ-मण्डप में भय और विष्णु से जीवन रक्षा की प्रार्थना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 34
Aug 11, 2025शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता – द्वितीय खंड के इस चौंतीसवें अध्याय में, वीरभद्र और महाकाली की सेनाओं के दक्ष यज्ञ की ओर बढ़ने पर यज्ञमण्डप में फैले भय और अपशकुनों का वर्णन है। आकाशवाणी के माध्यम से दक्ष के पापों का उद्घाटन होता है और भगवान विष्णु से जीवन रक्षा की प्रार्थना की जाती है। यह कथा शिवभक्ति, धर्म और कर्मफल के गूढ़ संदेश को उजागर करती है।
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शिव पुराण - वीरभद्र और महाकाली का यज्ञशाला की ओर प्रस्थान | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 33
Aug 03, 2025"तेँतीसवाँ अध्याय – वीरभद्र और महाकाली का यज्ञशाला की ओर प्रस्थान" इस अध्याय में भगवान शिव के आदेश पर वीरभद्र और महाकाली की विशाल सेना के साथ यज्ञ विनाश के लिए प्रस्थान का वर्णन है। शिवगणों, भूत-पिशाचों और नव दुर्गाओं सहित असंख्य शक्तियाँ भगवान शिव के अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए यज्ञशाला की ओर बढ़ती हैं। यह दृश्य शक्ति, भक्ति और न्याय का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
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शिव पुराण - शिवजी का क्रोध | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 32
Jul 28, 2025इस अध्याय में शिवजी के प्रचंड क्रोध का वर्णन है। जब सती माता ने यज्ञ में अपने अपमान से दुखी होकर देह त्याग दी, तब शिवगणों ने यह समाचार शिवजी को सुनाया। शिवजी अत्यंत क्रोधित हुए, उनकी जटा से वीरभद्र और महाकाली की उत्पत्ति हुई। वीरभद्र को आदेश दिया गया कि वह दक्ष यज्ञ को विध्वंस कर दे। इस अध्याय में क्रोध, न्याय और शिव की रौद्र लीला का वर्णन है।
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शिव पुराण - 'श्रीरुद्राष्टकम' हिंदी अर्थ | स्तुति | श्रावण मास
Jul 25, 2025रुद्राष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में रचित एक अद्भुत स्तोत्र है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। यह स्तुति शिव जी के निर्गुण, निर्विकल्प और परमेश्वर स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करती है। जो भी भक्त सच्चे मन से इसका पाठ करता है, उस पर भगवान शंकर की कृपा अवश्य होती है।
'श्री शिव रुद्राष्टकम' स्तुति का पाठ, जानिए इसका हिंदी अर्थ और महत्व
भावपूर्ण उच्चारण के साथ रुद्राष्टकम् का पाठ प्रस्तुत किया गया है। नियमित रूप से इसका श्रवण करने से मानसिक शांति, ऊर्जा और भक्तिभाव की अनुभूति होती है।
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शिव पुराण - आकाशवाणी | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 31
Jul 21, 2025अध्याय नाम: एकतीसवां अध्याय – आकाशवाणी
इस अध्याय में शिव पुराण के अनुसार उस महान यज्ञ में उत्पन्न हुए संकट के समय हुई दिव्य आकाशवाणी का वर्णन किया गया है। यह आकाशवाणी दक्ष के अहंकार, भगवान शिव और माता सती के अपमान, और धर्म विरोधी कृत्यों की कड़ी निंदा करती है। इसमें बताया गया है कि शिव एवं सती के अपमान से समस्त ब्रह्मांड के लिए विनाशकारी परिणाम उत्पन्न हो सकते हैं। यह अध्याय सती की महानता, शिव की सर्वोच्चता और यज्ञ के विध्वंस का स्पष्ट संकेत देता है।
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शिव जी का गुस्सा
शिव पुराण में दक्ष प्रजापति
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सती का बलिदान
दक्ष यज्ञ में आकाशवाणी
शिव पुराण का सारांश
शिव पुराण हिंदी अनुवाद
शिव और सती की प्रेम कथा
शिव पुराण - सती द्वारा योगाग्नि से शरीर को भस्म करना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 30
Jul 14, 2025सती का योगाग्नि में देह त्याग | दक्ष यज्ञ का विध्वंस और शिवगणों का क्रोध | शिव पुराण कथा
इस भावुक और अत्यंत मार्मिक अध्याय में जानिए कैसे माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान देखकर योगाग्नि में अपनी देह का त्याग किया। शिवगणों का भीषण आक्रमण, यज्ञ स्थल पर युद्ध, और सृष्टि में मचे हाहाकार ने पूरे ब्रह्मांड को हिला दिया।
यह कथा हमें भक्ति, सम्मान और अहंकार के विनाश का गहन संदेश देती है। देखिए कैसे सती के बलिदान ने आगे के घटनाक्रम की नींव रखी और शिव तांडव का आरंभ हुआ।
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Duration: 00:04:36शिव पुराण - यज्ञशाला में सती का अपमान |अध्याय 29 | श्रीरुद्र संहिता
Jul 07, 2025"सती का आत्मदाह | दक्ष यज्ञ में शिव का अपमान और सती का त्याग | शिव पुराण कथा"
इस भावुक और अत्यंत मार्मिक अध्याय में जानिए कैसे माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का घोर अपमान देखा और आहत होकर अपने प्राण त्यागने का कठोर निर्णय लिया। शिव निंदा का परिणाम, सती का क्रोध और आत्मदाह, और आगे आने वाली महाविनाश की शुरुआत — इस अध्याय में छिपा है भक्ति, सम्मान और धर्म की सच्ची गहराई का संदेश। देखिए कैसे सती का त्याग पूरे सृष्टि में हलचल मचा देता है।
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Duration: 00:08:12शिव पुराण - सती का दक्ष के यज्ञ में आना | अध्याय 28 | श्रीरुद्र संहिता
Jun 30, 2025"सती का यज्ञ में जाना | शिवजी का मना करना और सती का हठ | शिव पुराण कथा"
इस अध्याय में जानिए कैसे माता सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में जाने का निर्णय लेती हैं, जबकि शिवजी उन्हें रोकते हैं। अपनी जिद पर अड़ी सती, शिवजी का आशीर्वाद लेकर, भव्य श्रृंगार और शिवगणों के साथ यज्ञ स्थल की ओर प्रस्थान करती हैं। मार्ग में गूंजते शिव के जयकार, और सती की महान भक्ति का यह अध्याय हमें अहंकार, प्रेम और धर्म का गहरा संदेश देता है। देखिए कैसे इस निर्णय ने आगे चलकर पूरे ब्रह्मांड में हलचल मचा दी।
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शिव पुराण - दक्ष द्वारा महान यज्ञ का आयोजन | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 27
Jun 23, 2025"दक्ष प्रजापति का यज्ञ | भगवान शिव का अपमान और दधीचि का शाप | शिव पुराण की दिव्य कथा"
इस भावुक और धर्ममयी कथा में जानिए कैसे प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव को अपने महायज्ञ से निमंत्रण नहीं दिया, जिससे शिव का अपमान हुआ। महर्षि दधीचि का क्रोध, ऋषियों का त्याग, और अंततः ब्रह्मा और विष्णु द्वारा यज्ञ को पूरा करने का प्रयास—यह अध्याय धर्म, अहंकार और सच्चे श्रद्धा की गहराइयों को छूता है।
देखिए शिव पुराण के इस अध्याय में कैसे एक यज्ञ विवाद का कारण बन गया, और क्या हुआ दक्ष के यज्ञ का भविष्य?
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देवताओं का यज्ञ प्रसंग
त्रिलोकनाथ शिव कथा
Duration: 00:07:12शिव पुराण - दक्ष का भगवान शिव को शाप देना | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 26
Jun 16, 2025दक्ष का यज्ञ, भगवान शिव का अपमान और श्रापों का महा संग्राम | शिव पुराण कथा"
इस रोमांचक कड़ी में जानिए प्राचीन शिव पुराण की वह कथा जब प्रजापति दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया गया। शिव का अपमान, सती का विरोध, और नंदी व दक्ष के बीच श्रापों का आदान-प्रदान – यह सब बनता है इस अध्याय का मुख्य आकर्षण।
श्रद्धा, अहंकार, और धर्म के टकराव को दर्शाने वाली यह कथा हमें नीति, मर्यादा और भक्ति का गहन संदेश देती है।
देखिए कैसे ब्रह्मा, विष्णु और देवगण भी इस धर्मसंकट में उलझ जाते हैं, और क्या होता है दक्ष यज्ञ का परिणाम।
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पुराणों की कहानियाँ
हिन्दू धर्म ग्रंथ
शिव जी की कहानी
दक्ष यज्ञ का अंत
सती दक्ष पुत्री
पार्वती और सती कथा
शिव और सती की लीलाएं
दक्ष ने शिव को क्यों नहीं बुलाया
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Duration: 00:08:04शिव पुराण - श्रीराम का सती के संदेह को दूर करना | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 25
Jun 09, 2025“पच्चीरावाँ अध्याय: ‘श्रीराम का सती के संदेह को दूर करना’—इस अध्याय में श्रीरामचन्द्र जी द्वारा माता सती को यह कथा सुनाकर उनके हृदय से संदेह और मोह दूर किए जाते हैं। शंकर–सती के पारस्परिक प्रेम एवं उनकी परिक्षा का भावपूर्ण विवरण, स्तुति–लीला के स्वरूपों को उजागर करता है।”
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शिव पुराण - शिव की आज्ञा से सती द्वारा श्रीराम की परीक्षा | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 24
Jun 02, 2025इस अध्याय में सती द्वारा श्रीराम की परीक्षा लेने की कथा वर्णित है। जब सती को भगवान शिव की बातों पर संदेह हुआ, तब उन्होंने स्वयं सीता का रूप धारण कर श्रीराम की परीक्षा ली। इस परीक्षा के बाद श्रीराम ने सती को पहचान लिया, जिससे सती का भ्रम दूर हुआ। उन्होंने श्रीराम की महिमा को स्वीकार किया और उनके चरणों में प्रणाम किया। यह प्रसंग भक्तिरस, विनम्रता और आत्म-ज्ञान का बोध कराता है।
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शिव पुराण - शिव द्वारा ज्ञान और मोक्ष का वर्णन | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 23
May 26, 2025इस अध्याय में देवी सती भगवान शिव से ज्ञान और मोक्ष की महिमा के बारे में जानने की इच्छा प्रकट करती हैं।
भगवान शिव, भक्तिपूर्वक उनकी जिज्ञासा शांत करते हुए भक्ति, ज्ञान, मोक्ष और उनके आपसी संबंधों का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं।
वे श्रद्धा, प्रेम, सेवा, आत्मसमर्पण जैसे नौ अंगों की भक्ति को श्रेष्ठ बताते हैं और यह स्पष्ट करते हैं कि बिना भक्ति के ज्ञान अधूरा है और बिना ज्ञान के भक्ति भी फलदायक नहीं होती।
अंत में देवी सती सभी शास्त्रों का सार पूछती हैं और भगवान शिव उन्हें विभिन्न शास्त्रों—तंत्र, यंत्र, इतिहास, ज्योतिष, वैदिक धर्म—की महत्ता समझाते हैं।
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Duration: 00:06:20शिव पुराण - शिव–सती का हिमालय गमन | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 22
May 19, 2025इस अध्याय में देवी सती की इच्छा पर भगवान शिव उन्हें हिमालय पर्वत पर विहार के लिए ले जाते हैं। वर्षा ऋतु का सुहावना वातावरण देखकर देवी सती का मन प्रकृति में रमण करने को होता है। भगवान शिव उनकी भावना को समझते हुए उन्हें हिमालय लेकर जाते हैं। वहां दोनों कुछ समय प्रसन्नतापूर्वक विहार करते हैं और फिर अपने निवास स्थल कैलाश लौट आते हैं। यह अध्याय शिव-सती के प्रेम, सौंदर्य, अनुराग और दांपत्य जीवन के सौम्य पक्ष को दर्शाता है।
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शिव पुराण - शिव–सती विहार | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 21
May 12, 2025इस अध्याय में भगवान शिव और देवी सती के विवाह के पश्चात उनके कैलाश पर्वत पर आगमन, विदाई के प्रसंग, और उनके एकांत विहार का सुंदर चित्रण किया गया है। सती की तपस्या और शिवजी के प्रति उनका प्रेम, साथ ही शिवजी की प्रसन्नता व सती के सौंदर्य पर मोहित होना, दोनों के मिलन का एक भावुक और पूजनीय चित्र प्रस्तुत करता है।
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शिव पुराण - शिव-सती का विदा होकर कैलाश जाना | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 20
May 05, 2025इस अध्याय में भगवान शिव और देवी सती के विवाह के पश्चात उनके कैलाश लौटने की कथा वर्णित है। विदाई के समय दक्ष द्वारा सम्मानपूर्वक आशीर्वाद, देवताओं द्वारा स्तुति, शिव-सती की शोभायात्रा और विवाह के महात्म्य का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह अध्याय विवाह के धार्मिक महत्व और शिवभक्तों के लिए इस कथा के पुण्यफल की व्याख्या करता है।
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शिव पुराण - ब्रह्मा और विष्णु द्वारा शिव की स्तुति करना | | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 18
Apr 28, 2025"इस अध्याय में ब्रह्मा जी नारद जी को बताते हैं कि दक्ष द्वारा भगवान शिव को अनेक उपहार प्रदान किए गए। विष्णु भगवान भी लक्ष्मी जी के साथ भगवान शिव की भक्ति भाव से आराधना करते हैं।
वे शिवजी को संपूर्ण सृष्टि का रचयिता, पालनकर्ता और रक्षक बताते हैं। सभी देवता और ऋषि मुनि भगवान शिव के गुणगान में स्तुति करते हैं और संसार के कल्याण की कामना करते हैं।"
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शिव पुराण -शिव और सती का विवाह | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 18
Apr 21, 2025इस अध्याय में ब्रह्माजी कैलाश पर्वत जाकर भगवान शिव को प्रजापति दक्ष की स्वीकृति का समाचार देते हैं। शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और विवाह हेतु तत्पर हो जाते हैं। नारद और ब्रह्मा जी विवाह का संदेश लेकर दक्ष के पास जाते हैं। शुभ मुहूर्त तय होते ही चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव देवी सती की बारात लेकर कैलाश पर्वत से निकलते हैं। इस भव्य विवाह यात्रा में भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, सरस्वती सहित सभी देवता और ऋषि शामिल होते हैं।
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Duration: 00:04:30शिव पुराण - सती को शिव से व्रत की प्राप्ति | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 17
Apr 12, 2025इस अध्याय में देवी सती की कठोर तपस्या का फल मिलता है। भगवान शिव स्वयं प्रकट होकर उन्हें दर्शन देते हैं और उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। सती भगवान शिव से वर मांगने में संकोच करती हैं, किंतु शिवजी स्वयं उन्हें अर्धांगिनी बनाकर स्वीकार करते हैं।
इसके पश्चात सती अपने पिता दक्ष के पास लौटती हैं और शिव से प्राप्त वर की बात बताती हैं। प्रजापति दक्ष हर्षित होकर विवाह के लिए सहमत हो जाते हैं। अंत में ब्रह्मा जी शिवजी के निर्देश पर दक्ष के पास जाकर सती का विवाह प्रस्ताव रखते हैं और यह शुभ समाचार विवाह की ओर अग्रसर होता है।
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शिव पुराण का सत्रहवां अध्याय
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दक्ष प्रजापति और सती
शिव पुराण - रूद्रदेव का सती से विवाह | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 16
Apr 07, 2025इस अध्याय में ब्रह्मा, विष्णु और अन्य देवताओं द्वारा भगवान शिव की स्तुति की जाती है और उनसे अनुरोध किया जाता है कि वे लोकहित के लिए विवाह करें। भगवान शिव पहले अपने तप, वैराग्य और योगमयी जीवन का वर्णन करते हुए विवाह को अस्वीकार करते हैं, लेकिन फिर देवताओं के आग्रह और लोककल्याण हेतु विवाह स्वीकार करते हैं।
विष्णु भगवान उन्हें बताते हैं कि देवी उमा ही लक्ष्मी और सरस्वती के समान उनकी अर्धांगिनी बनने के लिए तीसरे रूप में देवी सती के रूप में प्रजापति दक्ष के घर जन्म ले चुकी हैं। सती घोर तपस्या कर रही हैं ताकि शिवजी को पति रूप में प्राप्त कर सकें।
यह अध्याय देवी सती की तपस्या की सिद्धि, देवताओं की याचना और शिवजी के विवाह की स्वीकृति का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।
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Duration: 00:05:20शिव पुराण - सती की तपस्या | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 15
Apr 06, 2025पंद्रहवां अध्याय – सती की तपस्या
इस अध्याय में ब्रह्माजी नारद को बताते हैं कि वे एक दिन नारद के साथ प्रजापति दक्ष के घर गए। वहाँ उन्होंने देवी सती को देखा और आशीर्वाद दिया कि वे भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करेंगी, क्योंकि वे दोनों एक-दूसरे के योग्य हैं।
इसके बाद सती ने अपनी माता से भगवान शिव को प्राप्त करने की इच्छा बताई और माता की अनुमति से घर पर ही भगवान शिव की तपस्या आरंभ कर दी। वे आश्विन से लेकर भाद्रपद तक पूरे वर्षभर विभिन्न मासों, तिथियों और विधियों से भगवान शिव का व्रत, उपवास, पूजन और स्मरण करती रहीं।
सती ने द्वादशवर्षीय नंदा व्रत का पालन किया और कठोर तप किया। अंत में उनकी तपस्या को देख सभी देवता, ब्रह्मा और विष्णु सहित, कैलाश पर्वत पर जाकर भगवान शिव से उनकी स्तुति करते हैं।
यह अध्याय देवी सती की अटल भक्ति, धैर्य, और संकल्प शक्ति का महान उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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Duration: 00:05:35शिव पुराण - दक्ष की साठ कन्याओं का विवाह | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 14
Apr 05, 2025स अध्याय में ब्रह्माजी नारद को बताते हैं कि दक्ष को शांत करने के लिए वे स्वयं उसके पास गए और उसे सांत्वना दी। दक्ष ने ब्रह्माजी की बात मानते हुए अपनी पत्नी से सात सुंदर कन्याएं प्राप्त कीं और उनका विवाह धर्म के अनुसार योग्य वरों से किया।
दक्ष ने:
10 कन्याओं का विवाह धर्म से,
13 कन्याओं का विवाह कश्यप मुनि से,
27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा से किया,
अन्य कन्याओं का विवाह भूतनिग्रह, कुशाश्व और तार्क्ष्य आदि से किया।
इन सभी के वंश से तीनों लोक भर गए।
इसके बाद दक्ष ने देवी जगदंबिका की भक्ति करके उनसे पुत्री रूप में जन्म लेने का वर प्राप्त किया। देवी प्रसन्न होकर दक्ष की पत्नी के गर्भ से जन्म लेने को तैयार हुईं। उचित समय पर देवी ने शिशु रूप में अवतार लिया, और उनका नाम 'उमा' रखा गया।
देवी उमा का पालन बड़े प्रेम से हुआ। वे बचपन से ही भगवान शिव की भक्ति में लीन रहती थीं और उनकी मूर्ति को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाया करती थीं।
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Duration: 00:03:36शिव पुराण: दक्ष द्वारा मैथुनी सृष्टि का आरंभ | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 13
Mar 27, 2025इस अध्याय में ब्रह्माजी नारद को बताते हैं कि देवी का वरदान प्राप्त कर प्रजापति दक्ष अपने आश्रम लौटे और मानसिक सृष्टि करने लगे। लेकिन उसमें वृद्धि न होते देख वे चिंतित हो उठे और ब्रह्माजी से उपाय पूछते हैं। ब्रह्माजी उन्हें शिव भक्ति करने और वीरण की पुत्री असिक्नी से विवाह कर मैथुनी सृष्टि का आरंभ करने की सलाह देते हैं।
दक्ष असिक्नी से विवाह करते हैं और उनके दस हज़ार पुत्र हर्यश्व जन्म लेते हैं। वे सभी सृष्टि कार्य हेतु तप करने निकलते हैं लेकिन नारद मुनि उन्हें वैराग्य का मार्ग दिखा देते हैं, जिससे वे वापस नहीं लौटते। इससे दक्ष अत्यंत दुखी होते हैं।
बाद में उनके एक हज़ार अन्य पुत्र शबलाश्व भी उसी मार्ग पर चलते हैं और वे भी वैराग्य धारण कर लेते हैं। नारद मुनि द्वारा बार-बार ऐसा किए जाने पर क्रोधित होकर दक्ष उन्हें शाप देते हैं कि वे तीनों लोकों में कहीं स्थिर नहीं रह सकेंगे।
नारद मुनि यह शाप शांत मन से स्वीकार कर लेते हैं और उनके मन में कोई विकार नहीं आता।
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शिव पुराण: दक्ष की तपस्या | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 12
Mar 26, 2025इस अध्याय में नारद जी, ब्रह्माजी से प्रश्न करते हैं कि प्रजापति दक्ष ने देवी की किस प्रकार तपस्या की और उन्हें क्या वरदान प्राप्त हुआ?
ब्रह्मा जी बताते हैं कि उनकी आज्ञा से प्रजापति दक्ष क्षीरसागर के तट पर तपस्या के लिए गए और वहां बैठकर देवी उमा को पुत्री रूप में प्राप्त करने की प्रार्थना करते हुए कठोर व्रत का पालन किया। तीन हजार दिव्य वर्षों तक केवल वायु और जल पर निर्वाह करते हुए उन्होंने घोर तप किया।
उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी कालिका (जगदंबा) अपने सिंह पर सवार होकर प्रकट हुईं। देवी ने दक्ष की भक्ति और नम्रता से प्रसन्न होकर उन्हें वर मांगने को कहा। दक्ष ने निवेदन किया कि वे उनकी पुत्री बनें और शिवजी से विवाह करें। उन्होंने कहा कि केवल देवी ही ऐसी हैं जो भगवान शिव को गृहस्थ आश्रम में लाने में समर्थ हैं।
देवी ने कहा कि वे स्वयं शिव की दासी हैं और प्रत्येक जन्म में शिव ही उनके स्वामी होते हैं। उन्होंने वचन दिया कि वे दक्ष के घर पुत्री रूप में जन्म लेंगी, लेकिन यह चेतावनी भी दी कि यदि कभी उनके प्रति आदर कम होगा, तो वे अपना शरीर त्याग देंगी।
अंत में देवी जगदंबा अंतर्धान हो गईं और प्रजापति दक्ष प्रसन्न मन से घर लौट आए।
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Duration: 00:04:34शिव पुराण: ब्रह्माजी की काली देवी से प्रार्थना | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 11
Mar 24, 2025स अध्याय में नारद जी के प्रश्न पर ब्रह्मा जी बताते हैं कि भगवान विष्णु के जाने के बाद उन्होंने देवी दुर्गा (योगनिद्रा, चामुंडा) का स्मरण किया और उनसे प्रार्थना की कि वे धरती पर अवतरित होकर भगवान शिव से विवाह करें। ब्रह्मा जी को यह चिंता थी कि शिवजी गृहस्थ जीवन में प्रवेश नहीं करना चाहते।
देवी चामुंडा प्रकट होकर कहती हैं कि भगवान शिव को मोह में डालना असंभव है, क्योंकि वे परम योगी और ब्रह्मचारी हैं, लेकिन ब्रह्मा जी की भक्ति से प्रसन्न होकर वे वचन देती हैं कि वे सती रूप में जन्म लेंगी और प्रयत्न करेंगी कि भगवान शिव गृहस्थ जीवन स्वीकार करें। अंततः देवी अंतर्धान हो जाती हैं।
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Duration: 00:03:22शिव पुराण: ब्रह्मा-विष्णु संवाद | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 10
Mar 17, 2025यह अध्याय शिव पुराण से लिया गया है और इसमें ब्रह्मा-विष्णु संवाद का वर्णन किया गया है। इसमें भगवान शिव के रुद्र अवतार और देवी सती के जन्म एवं विवाह की चर्चा की गई है।
ब्रह्मा की चिंता: ब्रह्माजी यह चाहते हैं कि भगवान शिव विवाह करें, इसलिए वे विष्णुजी से इस विषय में मार्गदर्शन मांगते हैं।विष्णुजी का उत्तर: विष्णुजी समझाते हैं कि भगवान शिव निर्गुण और परब्रह्म हैं, लेकिन वे रुद्र रूप में अवतरित होंगे, और उनकी पत्नी देवी सती होंगी।देवी शिवा (सती/पार्वती) की भूमिका: देवी सती प्रजापति दक्ष की पुत्री बनकर जन्म लेंगी और कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करेंगी।भगवान शिव का सर्वोच्च स्वरूप: विष्णुजी बताते हैं कि शिवजी और शिवा (सती) निर्गुण, ब्रह्मस्वरूप और भक्तों के अधीन हैं। वे भक्तों की इच्छानुसार कार्य करते हैं।दक्ष को आज्ञा: ब्रह्माजी को निर्देश दिया जाता है कि वे प्रजापति दक्ष को तपस्या करने के लिए कहें ताकि देवी सती का जन्म हो और वे भगवान शिव से विवाह करें।विष्णुजी का अंतर्धान: विष्णुजी अंतर्धान हो जाते हैं, और ब्रह्माजी को यह समझ आ जाता है कि उनके संदेहों और समस्याओं का समाधान क्या है।यह अध्याय भगवान शिव के रुद्र अवतार, देवी सती के जन्म और उनके विवाह की भविष्यवाणी को स्पष्ट करता है। यह भगवान शिव की दिव्यता और भक्तों के प्रति उनकी करुणा को भी दर्शाता है।
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शिव पुराण: ब्रह्मा का शिव विवाह हेतु प्रयत्न | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 9
Mar 10, 2025शिव पुराण - ब्रह्मा का शिव विवाह हेतु प्रयत्न
क्या कामदेव भगवान शिव को मोहित कर पाए? शिव पुराण के नवें अध्याय में जानिए कामदेव, रति, वसंत और ब्रह्मा के प्रयासों की अद्भुत कथा! इस वीडियो में विस्तार से बताया गया है कि कैसे ब्रह्माजी ने शिव विवाह के लिए यत्न किए और शिवजी की तपस्या अडिग रही।
🔹 आप जानेंगे:
✅ कामदेव के प्रयास और उनकी असफलता
✅ भगवान शिव के प्रति ब्रह्मा का प्रयत्न
✅ शिव विवाह का रहस्य और पौराणिक महत्व
✅ शिवजी की तपस्या और उनकी अलौकिक शक्ति
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Duration: 00:02:56शिव पुराण: काम की हार | श्रीरुद्र संहिता | द्वितीय खंड - अध्याय 8
Feb 25, 2025आठवाँ अध्याय – काम की हारइस अध्याय में ब्रह्माजी और नारद जी के संवाद द्वारा बताया गया है कि कैसे कामदेव ने भगवान शिव को मोहित करने का प्रयास किया और असफल रहा।नारद जी ने ब्रह्माजी से संध्या के विवाह के बाद की घटनाओं के बारे में पूछा। ब्रह्माजी ने बताया कि जब वे मोह में पड़ गए थे, तब भगवान शिव ने उनका उपहास किया। इस अपमान से क्रोधित होकर ब्रह्माजी ने शिवजी को मोहित करने के लिए कामदेव और उनकी पत्नी रति को योजना बनाने का निर्देश दिया।कामदेव ने ब्रह्माजी की आज्ञा मान ली और कहा कि उनका अस्त्र सुंदर स्त्री है, अतः भगवान शिव को आकर्षित करने के लिए किसी अद्वितीय सुंदर स्त्री की सृष्टि की जाए। ब्रह्माजी चिंता में पड़ गए और उनकी सांसों से पुष्पों से सजे वसंत का प्रकट होना हुआ।इसके बाद, कामदेव, वसंत, और अन्य सहायकों ने भगवान शिव को मोहित करने की योजना बनाई। उन्होंने शिवजी के पास जाकर उन्हें मोहित करने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हुए। मरतगणों को भी भेजा गया, लेकिन वे भी असफल रहे।अंत में, वसंत और अन्य सहायकों के साथ कामदेव ने एक और प्रयास करने का निर्णय लिया और रति सहित शिवजी के स्थान की ओर बढ़ गए।अध्याय का महत्व:इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि भगवान शिव योग और तपस्या में स्थित रहते हैं, इसलिए उन्हें किसी भी सांसारिक आकर्षण से विचलित नहीं किया जा सकता। यह अध्याय काम (इच्छाओं) पर आत्मसंयम की विजय को दर्शाता है।
Duration: 00:02:59शिव पुराण: संध्या की आत्माहुति | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 7
Feb 24, 2025सातवाँ अध्याय – संध्या की आत्माहुति
इस अध्याय में ब्रह्माजी नारद को संध्या देवी की कथा सुनाते हैं। भगवान शिव से वरदान प्राप्त करने के बाद संध्या मुनि मेधातिथि के यज्ञ स्थल पर पहुँचीं। उन्होंने आत्मशुद्धि के लिए यज्ञ की प्रज्वलित अग्नि में कूदकर आत्माहुति दी। उनके शरीर का ऊपरी भाग प्रातः संध्या और शेष भाग सायं संध्या में परिवर्तित हो गया।
भगवान शिव ने संध्या को दिव्य शरीर प्रदान किया। यज्ञ की समाप्ति पर मेधातिथि मुनि ने अग्नि में एक कन्या को पाया, जिसका नाम अर्घमती रखा। उसका लालन-पालन किया गया, और जब वह विवाह योग्य हुई, तो उसका विवाह महर्षि वशिष्ठ से संपन्न हुआ।
इस कथा का महत्व यह है कि संध्या वंदन और पूजन का धार्मिक महत्व समझाया गया है। साथ ही, यह बताया गया है कि जो इस पवित्र कथा को सुनते या पालन करते हैं, उनकी सभी कामनाएँ पूर्ण होती हैं।
Duration: 00:03:06शिव पुराण: संध्या की तपस्या | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 6
Feb 17, 2025अध्याय विवरण:इस अध्याय में संध्या की कठोर तपस्या और भगवान शिव द्वारा दिए गए वरदानों का वर्णन किया गया है। संध्या, जो मोक्ष प्राप्त करना चाहती थी, ने शिवजी की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें चार अवस्थाओं (शैशव, कौमार्य, यौवन, वृद्धावस्था) का विधान बताया और वरदान दिया कि जो भी उन्हें कामभाव से देखेगा, वह नपुंसक हो जाएगा।शिवजी ने संध्या को अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करने के लिए अग्नि में समर्पित होने का आदेश दिया। चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित मेधातिथि ऋषि के यज्ञ में प्रवेश कर संध्या ने अपने शरीर का त्याग किया और यह प्रतिज्ञा की कि वे अपने इच्छित स्वरूप में पुनर्जन्म लेंगी।इस प्रकार, संध्या की तपस्या सफल हुई, उन्हें शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ और वे पुनर्जन्म के लिए तत्पर हो गईं।
Duration: 00:07:01शिव पुराण : संध्या का चरित्र | श्रीरुद्र संहिता | द्वितीय खंड
Jan 11, 2025संध्या के जन्म और उनके कठोर तप की प्रेरणादायक कहानी। कैसे उन्होंने अपने जीवन को त्यागने का निश्चय किया और वशिष्ठ मुनि ने उन्हें तपस्या की विधि बताई। यह एपिसोड भक्ति, आत्मशुद्धि और तप के महत्व को दर्शाता है।
शिव पुराण हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव के जीवन, लीलाओं, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विस्तृत वर्णन किया गया है।
संरचना: शिव पुराण में कुल 24,000 श्लोक हैं, जो मुख्यतः सात संहिताओं में विभाजित हैं:
विद्येश्वर संहिता रुद्र संहिता कोटिरुद्र संहिता कैलास संहिता वायु संहिता उमा संहिता शतरुद्र संहिताविषय-वस्तु: इस पुराण में भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप, उनकी महिमा, उपासना विधियों, पूजा-पद्धति, ज्ञानप्रद आख्यानों और शिक्षाप्रद कथाओं का सुंदर संयोजन है। यह ग्रंथ भगवान शिव के विभिन्न रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का व्यापक वर्णन प्रस्तुत करता है।
महत्व: शिव पुराण का पठन और श्रवण भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा गया है कि इसका अध्ययन करने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर इस लोक में सुख भोगता है और अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है।
उपलब्धता: यदि आप शिव पुराण को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं, तो यह कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, 'महाकाव्य' वेबसाइट पर आप इसे हिंदी में पढ़ सकते हैं।
शिव पुराण भगवान शिव की महिमा का गान करता है और भक्तों को उनके प्रति भक्ति और श्रद्धा के मार्ग पर प्रेरित करता है।
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Duration: 00:04:24शिव पुराण : काम-रति विवाह | श्रीरुद्र संहिता | द्वितीय खंड
Jan 11, 2025यह एपिसोड कामदेव और रति के विवाह पर केंद्रित है। दक्ष ने अपनी पुत्री रति को कामदेव को सौंपा, और उनका विवाह बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह कहानी प्रेम, आनंद और सौंदर्य का उत्सव है, जो सुनने वालों को आकर्षित करती है।
शिव पुराण हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव के जीवन, लीलाओं, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विस्तृत वर्णन किया गया है।
संरचना:शिव पुराण में कुल 24,000 श्लोक हैं, जो मुख्यतः सात संहिताओं में विभाजित हैं:
विद्येश्वर संहिता रुद्र संहिता कोटिरुद्र संहिता कैलास संहिता वायु संहिता उमा संहिता शतरुद्र संहिताविषय-वस्तु:इस पुराण में भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप, उनकी महिमा, उपासना विधियों, पूजा-पद्धति, ज्ञानप्रद आख्यानों और शिक्षाप्रद कथाओं का सुंदर संयोजन है। यह ग्रंथ भगवान शिव के विभिन्न रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का व्यापक वर्णन प्रस्तुत करता है।
महत्व:शिव पुराण का पठन और श्रवण भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा गया है कि इसका अध्ययन करने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर इस लोक में सुख भोगता है और अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है।
उपलब्धता:यदि आप शिव पुराण को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं, तो यह कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, 'महाकाव्य' वेबसाइट पर आप इसे हिंदी में पढ़ सकते हैं।
शिव पुराण भगवान शिव की महिमा का गान करता है और भक्तों को उनके प्रति भक्ति और श्रद्धा के मार्ग पर प्रेरित करता है।
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Duration: 00:02:44शिव पुराण : कामदेव को ब्रह्माजी द्वारा शाप देना | श्रीरुद्र संहिता| द्वितीय खंड
Jan 11, 2025कामदेव की उत्पत्ति, उनकी शक्तियों और उनके द्वारा ऋषि-मुनियों को मोहित करने के कारण उन्हें ब्रह्माजी से शाप मिलने की कहानी। इस एपिसोड में जानें कि कैसे कामदेव ने शिवजी के क्रोध का सामना किया और अपने अस्तित्व को वापस पाने का वचन प्राप्त किया।
शिव पुराण हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव के जीवन, लीलाओं, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विस्तृत वर्णन किया गया है।
संरचना:शिव पुराण में कुल 24,000 श्लोक हैं, जो मुख्यतः सात संहिताओं में विभाजित हैं:
विद्येश्वर संहिता रुद्र संहिता कोटिरुद्र संहिता कैलास संहिता वायु संहिता उमा संहिता शतरुद्र संहिताविषय-वस्तु:इस पुराण में भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप, उनकी महिमा, उपासना विधियों, पूजा-पद्धति, ज्ञानप्रद आख्यानों और शिक्षाप्रद कथाओं का सुंदर संयोजन है। यह ग्रंथ भगवान शिव के विभिन्न रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का व्यापक वर्णन प्रस्तुत करता है।
महत्व:शिव पुराण का पठन और श्रवण भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा गया है कि इसका अध्ययन करने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर इस लोक में सुख भोगता है और अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है।
उपलब्धता:यदि आप शिव पुराण को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं, तो यह कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, 'महाकाव्य' वेबसाइट पर आप इसे हिंदी में पढ़ सकते हैं।
शिव पुराण भगवान शिव की महिमा का गान करता है और भक्तों को उनके प्रति भक्ति और श्रद्धा के मार्ग पर प्रेरित करता है।
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Duration: 00:04:19शिव पुराण : शिव-पार्वती चरित्र | श्रीरुद्र संहिता | द्वितीय खंड
Jan 11, 2025शिव पुराण हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव के जीवन, लीलाओं, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विस्तृत वर्णन किया गया है।संरचना:शिव पुराण में कुल 24,000 श्लोक हैं, जो मुख्यतः सात संहिताओं में विभाजित हैं: विद्येश्वर संहिता रुद्र संहिता कोटिरुद्र संहिता कैलास संहिता वायु संहिता उमा संहिता शतरुद्र संहिताविषय-वस्तु:इस पुराण में भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप, उनकी महिमा, उपासना विधियों, पूजा-पद्धति, ज्ञानप्रद आख्यानों और शिक्षाप्रद कथाओं का सुंदर संयोजन है। यह ग्रंथ भगवान शिव के विभिन्न रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का व्यापक वर्णन प्रस्तुत करता है। महत्व:शिव पुराण का पठन और श्रवण भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा गया है कि इसका अध्ययन करने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर इस लोक में सुख भोगता है और अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है। उपलब्धता:यदि आप शिव पुराण को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं, तो यह कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, 'महाकाव्य' वेबसाइट पर आप इसे हिंदी में पढ़ सकते हैं। शिव पुराण भगवान शिव की महिमा का गान करता है और भक्तों को उनके प्रति भक्ति और श्रद्धा के मार्ग पर प्रेरित करता है।Mahakavya - Read Ved Puran OnlineEbooks AngrahMahakavya - Read Ved Puran Online
Duration: 00:03:31शिव पुराण : सती चरित्र | श्रीरुद्र संहिता | खंड 2 | अध्याय 1
Jan 11, 2025शिव पुराण हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव के जीवन, लीलाओं, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विस्तृत वर्णन किया गया है।
संरचना:शिव पुराण में कुल 24,000 श्लोक हैं, जो मुख्यतः सात संहिताओं में विभाजित हैं:
विद्येश्वर संहिता रुद्र संहिता कोटिरुद्र संहिता कैलास संहिता वायु संहिता उमा संहिता शतरुद्र संहिताविषय-वस्तु:इस पुराण में भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप, उनकी महिमा, उपासना विधियों, पूजा-पद्धति, ज्ञानप्रद आख्यानों और शिक्षाप्रद कथाओं का सुंदर संयोजन है। यह ग्रंथ भगवान शिव के विभिन्न रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का व्यापक वर्णन प्रस्तुत करता है।
महत्व:शिव पुराण का पठन और श्रवण भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा गया है कि इसका अध्ययन करने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर इस लोक में सुख भोगता है और अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है।
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